धर्मबांका

बाजे-गाजे और जयकारे के बीच देवी मनसा एवं सती बिहुला की प्रतिमाओं का विसर्जन

बांका : बाजे-गाजे और जयकारे के बीच देवी मनसा एवं सती बिहुला की प्रतिमाओं का विसर्जन गत देर रात संपन्न हुआ। बांका सहित जिले भर में बड़े ही धूमधाम के साथ श्रद्धा और भक्ति के माहौल में बिहुला विषहरी की पूजा होती है जिसका समापन प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ ही कल रात हो गया। विसर्जन जुलूस में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।

बांका जिला सहित अन्य क्षेत्र में बिहुला विषहरी की पूजा पारंपरिक रूप से लोक पर्व के रूप में होती है। इन आयोजनों में समाज का एक बड़ा तबका हिस्सा लेता है। बिहुला विषहरी पूजा की वजह से कई दिनों तक यहां भक्ति और श्रद्धा का माहौल कायम हुआ रहता है। भजन कीर्तन और मनावन गीतों से संपूर्ण माहौल भक्ति से सराबोर रहता है। गंगा नदी के तट पर चंपा नगरी के विश्व विख्यात व्यापारी चांद सौदागर की शिव भक्ति और उनके सात पुत्रों एवं बहुओं की पौराणिक कथा पर आधारित इस पर्व को यहां बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।

मुख्य रूप से यह पर्व चांद सौदागर के कनिष्ठ पुत्र बाला लखेंद्र एवं उनकी पत्नी बिहुला की कथानक पर आधारित है जिसमें अपने पूजन से इंकार करने पर चांद सौदागर के प्रति रुष्ट मनसा देवी की कृपा से सर्पदंश से बाला लखंदर की मौत हो जाने के बाद भी सती बिहुला उनके प्राण यमराज से वापस ले आती हैं। इससे घर में फिर से सुख शांति बहाल हो जाती है। चांद सौदागर भी मनसा देवी की पूजा करने को राजी हो जाते हैं। बांका शहर में करहरिया, विजयनगर, मुर्गीडीह आदि स्थानों में धूमधाम के इस पर्व का आयोजन हुआ। इस अवसर पर यहां 3 दिनों तक मेले का माहौल रहा।

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