देवघरधर्मबांका

जन्माष्टमी पर विशेष : कान्हा… एक काॅमन मैन सेलिब्रेटी

उनके लिए नहीं हैं श्री कृष्ण जो खुद का ही अस्तित्व नीलाम करवाने पर तुले हैं..

■ डाॅ. उत्तम पीयूष

शायद कृष्ण अपनी तरह के अकेले नायक हैं जो इतने बड़े फैमिली इंटरटेनर भी हैं और फिलाॅस्फर भी। कुछ ऐसे कि बीच जंग के मैदान में जहाँ  मृत्यु का तांडव रचा जा रहा हो, वहाँ कर्म और जीवन का अद्भुत संदेश भी दे रहे हों। इतना डायमेंशनल व्यक्तित्व कि आज घर घर में जो बच्चे हैं वे कृष्ण बन रहे, सज रहे। हर माँ यशोदा की तरह बलैय्यां ले रही अपने अपने कान्हा की।जैसे हर मन वृंदावन हो, हर गांव गोकुल और हर बच्चा मुरलीवाला।

और जो दाँव पेंच के खलीफे हैं वे गौर फरमाएं! कृष्ण के शानदार पालिटिकल सेंस पर। कृष्ण  जितना खुलते हैं उतना ही खोलते भी हैं कि जैसे जितना बंधते हैं उतने बांधते भी हैं। नासमझ को वे समझाते नहीं और जो समझदार हैं वे उनकी खामोशियों को अहसास लेते हैं। जो कृष्ण गोपिकाओं के कपड़े गोकुल के यमुना  तट पर चुरा लेते हैं ठिठोली करते हुए- वही पार्थ सारथी हस्तिनापुर की कौरव सभा में द्रोपदी को निर्वसन होने से बचा भी लेते हैं । कृष्ण का दर्शन उनको समझने से अधिक फील करने से संभव हो पाता है। बुद्ध, मार्क्स, हीगल, सात्र, कामू, फूको, ताओ और देरिदा तक को समझना हो तो कृष्ण को समझकर निकलें.. रास्ते आसान हो जाऐंगे।

डॉ उत्तम पीयूष

रही बात हमारी तो..
जो सभ्यताएं अपनी नदियां नहीं बचा सकतीं, जो लोग अपने पहाड़ नीलाम करवा देते हैं और जो लोग कदंब का गाछ नहीं पहचानने देते नयी पीढ़ी को, जो बच्चे कृष्ण तो बन जाते हैं पर उन्हें  यह बतलाया नहीं जाता कि चानन (चंदन) एक नदी ही नहीं किसी समुदाय की थाती भी हैं, ओढ़नी, डकाय जैसी नदियाँ, मंदार, जेठौर जैसे पहाड़, कटोरिया से जमुई तक फैले जंगलों  का हमसे क्या रिश्ता है- तब तलक किताबी यमुना और गोवर्धन पहाड़ रटा कर क्या होगा!
यहाँ श्रीकृष्ण इंटरफेयर करते हैं क्योंकि वे एक इनडीजिनश नायक हैं। वे समाज को बेसुरा करके सुर नहीं छेड़ते। उनके लिए गाय, गोकुल, गोपियां , ग्वाल बाल उतने ही महत्वपूर्ण हैं  जितने मित्र अर्जुन, सुदामा और उद्ववजी।

जितना महाभारत बाहर रचा गया उससे अधिक उन्होंने महानायकों भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य, विदुर और कर्ण के अंदर रच दिया। उनके लिए पालिटिक्स न्याय और धर्म रक्षार्थ रहा ना कि शक्ति के दुरूपयोग के लिए कोई ट्रिक !
आज यदि कृष्ण का मैजिक समझना हो तो कर्म को इंज्वाय करके देखिए। जो कर्मवीर (!) भारी भारी उपदेशों का बोझ उठा उठा कर चल नहीं  सकते, वे कृष्ण की बांसुरी का माधुर्य तो अनुभव करें!

कृष्ण सहज और सरल जीवन को सुर और राग में जीने का रास्ता बतलाने वाले नायक हैं। अहंकारी जरासंध और दुर्योधन के लिए वे महाकाल हैं पर जहाँ प्रेम है, जहाँ जीवन है, जहाँ मधुमय परिवेश है, वहाँ आप रमिए, वहाँ कृष्ण का मन वृंदावन आपका स्वागत करेगा बंधु..!
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लेखक साहित्यकार और सामाजिक एक्टिविस्ट हैं.

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One Comment

  1. लेखक साहित्यकार और सामाजिक एक्टिविस्ट डॉ. उत्तम पीयूष जी को श्री कृष्णजन्माष्टमी की हार्दिक बधाई।आपने हमें कृष्ण लीला से परिचित कराया उसके लिए आपका विशेष आभारी हूँ।
    धन्यवाद
    अमृतेश कुमार【सत्या】
    पटना विश्वविद्यालय, पटना-04

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