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स्वास्थ्य सिर्फ शरीर नहीं, मन- भाव व आत्मा से भी जुड़ा है : स्वामी निरंजनानंद

मुंगेर आश्रम (बांका लाइव ब्यूरो) : विश्व योग पीठ के परमाचार्य परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने कहा कि धर्म का मतलब अच्छाई की अभिव्यक्ति है. धर्म के तीन आधार है सदविचार, सदव्यवहार और सदकर्म. इसे आत्मसात कर हम अपने जीवन को बेहतर बना सकते है. ये बाते उन्होंने पादुका दर्शन में मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम के कही.

स्वामी निरंजनानंद ने स्वास्थ्य के मौलिक चिंतन की अवधारणा को अभिव्यक्त करते हुए कहा कि स्वास्थ्य का मतलब सिर्फ शारिरिक स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि अब तसे विश्व स्वास्थ्य संगठन यह मानने लगा है कि शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य ही संपूर्ण स्वास्थ्य है. स्वयं में स्थिर होना ही स्वास्थ्य है. योग का स्वास्थ्य से गहरा ताल्लुक है. बचपन में या युवा अवस्था के दौरान हम योग का अभ्यास करते है. उसका प्रभाव बुढापे में दिखता है. प्राण शक्ति मजबूत होती है.

वैदिक समाज में वाणप्रस्थ आश्रम में साधना का मार्ग बतलाया है. साधना का मार्ग योग है. इस दौरान ही पवन मुक्त आसन, उदर श्वसन, नारी शोधन प्राणायाम, योग निंद्रा, ध्यान, मंत्र जाप और स्वाध्याय के माध्यम से हम जीवन को बेहतर तरीके से जी सकते है. हमारे चिंतन में अच्छाई होनी चाहिए और बुराई तो न देखो, न सुनो और न बोलो. उन्होंने परिवार के टुटने और वृद्धों की उपेक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पाश्चायत देशों का रोग अब अपने यहां भी फैल रहा है. तेजी से ओल्ड एज होम खुलना इसका परिचायक है.

उन्होंने कहा कि मनुष्य की जब उत्पत्ति हुई तो वह दौर पासान काल का था. जिसके मूल आधार थे पालन, पोषण और सुरक्षा. बाद में पूरब से पश्चिम के देशों में जो जीवन हो गया है. वह अर्थ और काम तक सिमित हो गया है. जीवन को चार भागों में बांटा गया है. जिसमें ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वाणप्रस्थ और संन्यास आश्रम है. दरअसल में आश्रम कोई जगह नहीं है. पूरा जीवन ही एक आश्रम है. ब्रह्मचर्य आश्रम में ज्ञान को ग्रहण किया जाता है और गृहस्थ आश्रम में उस ज्ञान को अर्थो उपार्जन में लगाया जाता है.

वहीं वाणप्रस्थ आश्रम में सामाजिक, पारिवारिक और व्यवसायिक जीवन से मुक्त अवकाश का जीवन होता है. इसकी कोई दिशा नहीं होती है. इसलिए घर्म मार्ग पर चल कर हम जीवन को बेहतर बना सकते है. इस मौके पर रामायण मंडल द्वारा रामायण का पाठ किया गया. कार्यक्रम में स्वामी ज्ञान भिक्षु, स्वामी केवल्यानंद, स्वामी शिवध्यानम, स्वामी गोरखनाथ के साथ-साथ देश के विभिन्न हिस्सों और दुनिया के विभिन्न देशों के सन्यासी इस कार्यक्रम में मौजूद थे.

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